Thursday, August 28, 2008

आइये आपदा में साथ खड़े हो

बिहार में बाढ़ की विभीषिका ने एक बार फिर साबित कर दिया है की हम प्रगति के कितने भी मुकाम हासिल कर लें प्रकृति के कोप के आगे हम बेबस ही नजर आते है.लेकिन मुसीबत की इस घड़ी में हमारे हाथ एक चीज है जिससे हम एक दुसरे की मुसीबत का बोझ कम कर सकते है और वह है एक जुट होकर इस प्राकृतिक आपदा से लड़ने और बहार निकलने की कोशिश। आइये इसी संकल्प और विश्वास के साथ अपने बिहारी भाइयो के साथ खड़े हो

स्वान्तः सुखाय चेरिटेबल ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया टीम

Sunday, August 24, 2008

हरे कृष्ण

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये

स्वान्तः sh

Wednesday, August 20, 2008

सुनहरा दिन बीजिंग में

भारत के लिए २० अगस्त का दिन बेहतरीन साबित हुआ हैदेश की झोली me एक कांस्य पदक गया और एक कम se कम पक्का हो गयाअभिनव के गोल्ड के बाद मिली इस दोहरी ुशी से पूरा देश झूम रहा हैउम्मीद करनी चाहिए की ये सिलसिला आगे बढेगा। अभिनव की जीत से इटर सुशिल और बिजेंद्र की जीत कुछ खास मायने रखती हैक्योंकि ये दोनों भारत की उस आबादी का हिस्सा है.जिनके हाथ बचपन से एक ही चीज़ आती है और वो है हर कदम पर संघर्षऔर जब जीत इस हिस्से से आती है तो देश की प्रगति की राह वास्तव में आसान नजर आती हैयही वो तबका है जहाँ देश की वास्तविक उर्जा छिपी है. इन दोनों के परिजनों का चेहरा पूरे देश ने देखा होगा और इनके पीछे छिपी उम्मीद भीअब जरुरत है कि, इस जीत को आदत में बदलने के लिए देश के हुक्मरान इनामो की मौसमी बारिस करने के बाद चुप्पी साध कर बेठे। शायद ये संकल्प का वक्त है

स्वान्तः सुखाय चरिताब्ले ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया टीम

Saturday, August 16, 2008

रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाये

सभी भाई बहनों को राखी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाये।

Friday, August 15, 2008

भगत सिंह को सलाम

भगत सिंह की प्रतिमा संसद में तीस साल की जद्दोजहद के बाद स्थापित हो गई स्वतंत्रता दिवस पर आज़ादी के महानायक के लिए इस सम्मान पर जाहिर तौर पर सबको खुशी हुई होगी। लेकिन क्रांतिवीर भगत सिंह की आत्मा शायद सम्मान को स्वीकारने के बजये बेबस पीड़ा से करह रही होगी.हँसते हँसते फँसी के फंदे के चूमने वाले आज़ादी के दीवाने कैसे बर्दास्त करेंगे की उनकी प्रतिमा उस प्रांगन में मूकदर्शक बन कर रहेगी जिसे नापाक आतंकी वारदात का निशाना बनना पड़ा। जिन वीरो ने अपनी जान की बजी लगाकर लोकतंत्र के इस मन्दिर और भारत देश की लाज को बचाया उनका कातिल आज भी सियासी बहस का मुद्दा बनकर शान से जिन्दा है.जिन लोगो ने मौलाना मसूद अजहर की रिहाई की त्रासदी को देखा hai उनकी ये चिंता भी अन्यास नही हो सकती की कही एक और कंधार जैसी वारदात को दोहराकर देश की शान पर हमला करने वाले अफजल को भी आतंकी पुरे देश को मुह चिढ़ते हुए लेकर चले जाए संसद पहुंचकर भगतh को बापू से भी एक sikayat होगी की वे भी अब अहिंसा ka रत्ता लगना छोड़ संसद में मौन होकर आँखे बंद कर बैठे हैं.इस भरोसे की शायद अपने आप ही कुछ चमत्कार हो जाए

swantah सुखाय चेरिताबल ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया टीम.

Thursday, August 14, 2008

मनमोहन का भाषण

राहुल गाँधी को कलावती और सशिकला की परेशानी में परमाणु उर्जा की जरुरत महसूस हुई थी तो प्रधानमत्री मनमोहन सिंह ne लाल की प्राचीर से अपने बचपन में बिजली की किल्लत को याद करके करार के पछ में जनमानस को कुरेदने की कोशिश कीस्वन्त्रत्रता की ६२ वी वर्श्गंथा और अपने कार्यकाल के अन्तिम साल में मनमोहन ने चिरपरिचित नरम अंदाज में हर मुद्दे को टटोला जिसके सहारे उन्हें जनता के पास जाना hai। लेकिन मनमोहन ने amarnath shrine और महंगाई की उस आग पर जिसमे पूरा देश झुलस रहा है ऐसा कुछ भी नही कहा जो लोगो को अपील करे. चंद्रयान मिशन की तैआरी और परमाणु करार को मूर्त रूप लेते देखना इस पीढी के लिए रोमांच भरा हैशिछा के फोरम पर आई आई टी और आईआईएम की दुनी संख्या भी देश के प्रगति सोपान पर आगे बढ़ने की कहानी ही बयां करता हैलेकिन प्रधानमत्री को शायद याद होगा की राइट टू एजुकेशन अभी सपना ही है और उसके बिना असल लडाई बाकि ही रहेगीमनमोहन ने देश के उस तबके को बढ़ी तनख्वाह के तोहफे की चर्चा की जो महीने के सातवे दिन से ही अगली तनख्वाह का इंतजार करने लगता हैहालाँकि इसमे पहले से मालामाल बुरोक्रतेस भी शामिल है। lekin सवाल फिर भी क्या इससे कामकाज का ढर्रा भी बदलेगाक्या बढ़ी तनख्वाह इतनी है की इससे उस उपर की आमदनी की उस आदत पर विराम लगे जो ख़ुद कर्मचारियों को भी अपने महकमे से बाहर छोटे छोटे कामो की लिए रुलाती हैलेकिन अब इस पर चर्चा करने का नैतिक अधिकार शायद नेताओं ने खो दिया haiअच्छा होता की मनमोहन संसद में सांसदों की बिकने की कहानी पर भी कुछ कहने का साहस जुटा पाते और संकल्प का इजहार भी की देश की संसद वैशाली की नगरवधू कभी नही हो सकतीआख़िर हमारी स्वतंत्रत और लोकतंत्र का आइना तो यही हैं

मनमोहन का भाषण

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वतंत्रता की ६२ वी वर्षगांठ पर राष्ट्र के नाम संबोधन में ज्यादातर पुरानी बाते दोहराई हैअपने कार्यकाल के अन्तिम साल में उन्होंने अपने naram अंदाज़ में लगभग हर मुद्दे को टटोला,लेकिन हाल ही में जिन समस्याओ ने पुरे देश को चिंतित किया है मनमोहन ne उन पर ऐसी कोई बात नही कही जो लोगो को अपील करेखासकर अमरनाथ श्रीन बोर्ड के मसले पर और महंगाई की आग पर जिसमे देश का बहुसंख्यक व्यक्ति झुलस रहा है. शिछा के फोरम पर मनमोहन ne देस को जो कुछ बताया वह भारत के प्रगति सोपान पर आगे बढ़ने की कहानी जरूर बताता है, आई आई टी और आईआईएम की संख्या बढ़कर दूनी हो गई है.विश्वविद्यालय और कालेज भी बढ़ी संख्या में खुल रहे है. लेकिन मनमोहन को shayad ध्यान होगा कि राइट टू एजूकेशन का मसला अभी सपना ही है और इसके बिना असल लडाई बाकी ही रहेगीहाँ सबसे महत्वपूर्ण तोहफा देश के उन लोगो को मिला है जो महीने के सातवे दिन से ही अगली तनख्वाह का इंतजार करने लगता है.लेकिन सवाल फिर भी कि क्या काम काज का ढर्रा भी बदलेगाक्या बढ़ी तनख्वाह इतनी है कि कर्मचारिओं को उस उपरी आमदनी से परहेज होने लगे जो ख़ुद उन्हें भी अपने महकमे से बाहर छोटे छोटे कामो के लिए रुलाती है.और भी अच्छा लगता जब मनमोहन देश की संसद में सांसदों के बिकने कि कहानी पर भी कुछ कहतेसाथ में संकल्प का इजहार भी कि संसद वैशाली कि नगरवधू नही हो सकतीआख़िर हमारी स्वतंत्रता का आइना तो यही है.
स्वान्तः सुखाय चरिताब्ले ट्रस्ट स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के उन अमर शहीद जवानो को सलाम करता है,जिनकी कुर्बानियो की आधारशिला पर देश कों आजादी की raah नसीब हुई। लेकिन उनके सपनो से इतर चंद लोगो ने दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतंत्र कों जिस तरह हास परिहास की वस्तु बनने की कोशिश की है उसने आजादी के उत्साह कों ६१ साल बाद भी परवान नही चढ़ने दिया है। यह भी सच है कि बीते वक्त में देस ने कई करवट ली है और कई मील के पत्थर भी स्थापित किए है। लेकिन जादातर सफलताए देस के सिस्टम या सामूहिक उपलब्धि के बजाये लोगो के व्यक्तिगत हुनर की वजह से है। अभिनव बिंद्रा पर्सनल अचिएवेमेंट के तजा गवाह है तो मोनिका के डोपिंग की मनगढ़ंत कहानी देस के सिस्टम की जीती जागती तस्वीर। लेकिन सब कुछ ऐसे ही कैसे चल सकता है.ये सवाल बार बार मन में कौंधता है। फिर एक आवाज आती है शायद मन से कि हमें आगे आना होगा,जहा से जैसे भी कुछ कर सकते है तो करना होगा.आख़िर चुप्पी क्यों और कब तक। आइये मिलकर आगे कदम बढाये।
स्वान्तः सुखाय चरिताब्ले ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया टीम । वी फॉर यू।

लीक से`हटकर

लीक पर वे चले जिनके चरण दुर्बल और हारे है,हमें तो जो हमारी यात्रा से बने ऐसे अनिर्मित पथ प्यारे है। सर्वेश्वर जी की ये पंक्तिया उन करोणों लोगो के लिए प्रेरणा स्रोत है जिन्हें अपने सपनो के लिए रास्ते की तलाश शिद्दत के साथ होती है। आइये हम अपनी मंजिल की तलाश ख़ुद अपनी ही चुनी राह से करे।


स्वान्तः सुखाय चरिताब्ले ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया टीम ।

देस की जरुरत

स्वतंत्रता के ६१ साल पूरे हो गए। हम विकास पथ पर लगातार आगे बढ़ रहे है.लेकिन हमारे बुनियादी सवाल आज भी पहले जैसे ही है। देश की बहुसंख्य आबादी आज भी दो जून की रोटी तलाशने में अपनी सारी उर्जा खर्च करने को तैयार खड़ी नजर आती है लेकिन उसे रोटी नसीब नही होती। पढ़ा लिखा तबका रोजगार की तलाश में भटकता है,लेकिन उसे उम्मीद की किरण नही नजर आती। आख़िर क्यो. ये सवाल जितना पुराना है उतनी ही पुरानी इसका जबाब पाने की जद्दोजहद। लेकिन अब सायद वक्त आ गया है जब हमें इन सवालों के जबाब के लिए अपने नेताओं की ओर देखने के बजे ख़ुद ki ओर देखने की जरुरत है। इस मुहिम में पूरे जज्बे के साथ खड़ी है स्वान्तः सुखाय चैरेताब्ले ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया की टीम. आइये हाथ मिलाये और बढे साझा मिशन पर।
स्वान्तः सुखाय टीम स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक सुभ्कम्नाओ सहित.

Wednesday, August 13, 2008

Greetings

DearAnju didi,
Alot of greeting to you.
We as a team ready for Social revolution.
I hope we will suceed in our mission.
with regard,s
pankaj kumar pandey.