स्वतंत्रता के ६१ साल पूरे हो गए। हम विकास पथ पर लगातार आगे बढ़ रहे है.लेकिन हमारे बुनियादी सवाल आज भी पहले जैसे ही है। देश की बहुसंख्य आबादी आज भी दो जून की रोटी तलाशने में अपनी सारी उर्जा खर्च करने को तैयार खड़ी नजर आती है लेकिन उसे रोटी नसीब नही होती। पढ़ा लिखा तबका रोजगार की तलाश में भटकता है,लेकिन उसे उम्मीद की किरण नही नजर आती। आख़िर क्यो. ये सवाल जितना पुराना है उतनी ही पुरानी इसका जबाब पाने की जद्दोजहद। लेकिन अब सायद वक्त आ गया है जब हमें इन सवालों के जबाब के लिए अपने नेताओं की ओर देखने के बजे ख़ुद ki ओर देखने की जरुरत है। इस मुहिम में पूरे जज्बे के साथ खड़ी है स्वान्तः सुखाय चैरेताब्ले ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया की टीम. आइये हाथ मिलाये और बढे साझा मिशन पर।
स्वान्तः सुखाय टीम स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक सुभ्कम्नाओ सहित.
Thursday, August 14, 2008
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