लीक पर वे चले जिनके चरण दुर्बल और हारे है,हमें तो जो हमारी यात्रा से बने ऐसे अनिर्मित पथ प्यारे है। सर्वेश्वर जी की ये पंक्तिया उन करोणों लोगो के लिए प्रेरणा स्रोत है जिन्हें अपने सपनो के लिए रास्ते की तलाश शिद्दत के साथ होती है। आइये हम अपनी मंजिल की तलाश ख़ुद अपनी ही चुनी राह से करे।
स्वान्तः सुखाय चरिताब्ले ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया टीम ।
Thursday, August 14, 2008
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