राहुल गाँधी को कलावती और सशिकला की परेशानी में परमाणु उर्जा की जरुरत महसूस हुई थी तो प्रधानमत्री मनमोहन सिंह ne लाल की प्राचीर से अपने बचपन में बिजली की किल्लत को याद करके करार के पछ में जनमानस को कुरेदने की कोशिश की। स्वन्त्रत्रता की ६२ वी वर्श्गंथा और अपने कार्यकाल के अन्तिम साल में मनमोहन ने चिरपरिचित नरम अंदाज में हर मुद्दे को टटोला जिसके सहारे उन्हें जनता के पास जाना hai। लेकिन मनमोहन ने amarnath shrine और महंगाई की उस आग पर जिसमे पूरा देश झुलस रहा है ऐसा कुछ भी नही कहा जो लोगो को अपील करे. चंद्रयान मिशन की तैआरी और परमाणु करार को मूर्त रूप लेते देखना इस पीढी के लिए रोमांच भरा है। शिछा के फोरम पर आई आई टी और आईआईएम की दुनी संख्या भी देश के प्रगति सोपान पर आगे बढ़ने की कहानी ही बयां करता है। लेकिन प्रधानमत्री को शायद याद होगा की राइट टू एजुकेशन अभी सपना ही है और उसके बिना असल लडाई बाकि ही रहेगी। मनमोहन ने देश के उस तबके को बढ़ी तनख्वाह के तोहफे की चर्चा की जो महीने के सातवे दिन से ही अगली तनख्वाह का इंतजार करने लगता है। हालाँकि इसमे पहले से मालामाल बुरोक्रतेस भी शामिल है। lekin सवाल फिर भी क्या इससे कामकाज का ढर्रा भी बदलेगा। क्या बढ़ी तनख्वाह इतनी है की इससे उस उपर की आमदनी की उस आदत पर विराम लगे जो ख़ुद कर्मचारियों को भी अपने महकमे से बाहर छोटे छोटे कामो की लिए रुलाती है। लेकिन अब इस पर चर्चा करने का नैतिक अधिकार शायद नेताओं ने खो दिया hai। अच्छा होता की मनमोहन संसद में सांसदों की बिकने की कहानी पर भी कुछ कहने का साहस जुटा पाते और संकल्प का इजहार भी की देश की संसद वैशाली की नगरवधू कभी नही हो सकती। आख़िर हमारी स्वतंत्रत और लोकतंत्र का आइना तो यही हैं।
Thursday, August 14, 2008
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4 comments:
अच्छा होता की मनमोहन संसद में सांसदों की बिकने की कहानी पर भी कुछ कहने का साहस...
नवयुग यदि आएगा तो विचार शोधन द्वारा ही, क्रान्ति होगी तो वह लहू और लोहे से नही, विचारो की विचारो से काट द्वारा होगी, समाज का नवनिर्माण होगा तो वह सद् विचारो की स्थापना द्वारा ही संभव होगा |
bas isi intjar me prayasrat.
मनमोहन का भाषण कुटिलता भरा था : 1. खुद कांग्रेस ने अमरनाथ यात्रियो के आवास सुविधा के लिए दी गई जमीन, अन्य धर्मावलम्बीयो के तुष्टीकरण हेतु वापस ले कर साम्प्रदायिकता फैलाने का काम किया । लेकिन मनमोहन ने दोष मढ दिया हिन्दुओ पर । 2. अल्पसंख्यकवाद, क्षेत्रवाद को बढा कर देश की एकात्मकता को नष्ट कर रही है कांग्रेस लेकिंन भाषण का अन्दाज यह था की यह दुसरे करा रहे हैं ।
मनमोहन का भाषण कुटिलता भरा था : 1. खुद कांग्रेस ने अमरनाथ यात्रियो के आवास सुविधा के लिए दी गई जमीन, अन्य धर्मावलम्बीयो के तुष्टीकरण हेतु वापस ले कर साम्प्रदायिकता फैलाने का काम किया । लेकिन मनमोहन ने दोष मढ दिया हिन्दुओ पर । 2. अल्पसंख्यकवाद, क्षेत्रवाद को बढा कर देश की एकात्मकता को नष्ट कर रही है कांग्रेस लेकिंन भाषण का अन्दाज यह था की यह दुसरे करा रहे हैं ।
मनमोहन का भाषण कुटिलता भरा था : 1. खुद कांग्रेस ने अमरनाथ यात्रियो के आवास सुविधा के लिए दी गई जमीन, अन्य धर्मावलम्बीयो के तुष्टीकरण हेतु वापस ले कर साम्प्रदायिकता फैलाने का काम किया । लेकिन मनमोहन ने दोष मढ दिया हिन्दुओ पर । 2. अल्पसंख्यकवाद, क्षेत्रवाद को बढा कर देश की एकात्मकता को नष्ट कर रही है कांग्रेस लेकिंन भाषण का अन्दाज यह था की यह दुसरे करा रहे हैं ।
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