बिहार में बाढ़ की विभीषिका ने एक बार फिर साबित कर दिया है की हम प्रगति के कितने भी मुकाम हासिल कर लें प्रकृति के कोप के आगे हम बेबस ही नजर आते है.लेकिन मुसीबत की इस घड़ी में हमारे हाथ एक चीज है जिससे हम एक दुसरे की मुसीबत का बोझ कम कर सकते है और वह है एक जुट होकर इस प्राकृतिक आपदा से लड़ने और बहार निकलने की कोशिश। आइये इसी संकल्प और विश्वास के साथ अपने बिहारी भाइयो के साथ खड़े हो।
स्वान्तः सुखाय चेरिटेबल ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया टीम
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